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युद्ध के कारण वैश्विक तेल मांग फिर 2020 के स्तर पर पहुंची

युद्ध के कारण वैश्विक तेल मांग फिर 2020 के स्तर पर पहुंची

वैश्विक तेल मांग (Global Oil Demand) में 2026 के दौरान प्रतिदिन 10 लाख (1 मिलियन) बैरल की गिरावट आने का अनुमान है। CNBC ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि वैश्विक हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) की खपत पहली बार 2020 की महामारी के बाद नकारात्मक वृद्धि (Negative Growth) के क्षेत्र में पहुंच सकती है।

इस गिरावट का मुख्य कारण ईरान के साथ जारी युद्ध है, जिसने मध्य पूर्व में पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालांकि, इसका असर सभी क्षेत्रों और सभी प्रकार के तेल उत्पादों पर समान नहीं रहा है। सबसे बड़ी समस्या हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से पैदा हुई, जिसने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से होने वाली लंबे समय से स्थापित तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है।

IEA का मौजूदा अनुमान एक आशावादी परिदृश्य (Optimistic Scenario) पर आधारित है, जिसमें युद्धविराम (Ceasefire) और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर से शुरू होने की संभावना मानी गई है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमलों के आदान-प्रदान को देखते हुए यह संभावना अब कम होती दिखाई दे रही है। वाणिज्यिक जहाजों पर कई हमलों के बाद इस जलमार्ग से होने वाला समुद्री परिवहन एक बार फिर लगभग पूरी तरह ठप हो गया है।

IEA का कहना है कि वर्ष के अंत तक तेल बाजार में आपूर्ति अधिशेष (Surplus) की स्थिति बन सकती है, लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल टैंकरों की आवाजाही कब और कितनी जल्दी सामान्य होती है। एजेंसी के तेल विभाग की प्रमुख टोरिल बोसोनी (Toril Bosoni) ने CNBC से कहा कि बाजार को तेज और सीधी रिकवरी (Quick Linear Recovery) की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। स्थिति अभी भी बेहद अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में बढ़ते उत्पादन और घटती मांग के कारण दिसंबर तक तेल बाजार में अधिशेष आपूर्ति बनने की कुछ संभावना जरूर है।

भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालात फिलहाल आशावाद की ज्यादा गुंजाइश नहीं छोड़ते। तकनीकी वार्ता (Technical Talks) के लिए अमेरिका की ओर से तैयार होने के बयान के बावजूद, हाल ही में अंकारा (Ankara) में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूप से युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा की और ईरान द्वारा जहाजों पर किए गए हमलों को "आतंकवादी कृत्य (Acts of Terrorism)" बताया।

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