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मंगलवार को GBP/USD मुद्रा जोड़ी में वास्तविक ट्रेडिंग गतिविधि केवल अमेरिकी महंगाई (Inflation) रिपोर्ट जारी होने के बाद ही देखने को मिली। रिपोर्ट प्रकाशित होते ही कीमत में तेज़ उछाल आया, लेकिन दिन समाप्त होने तक यह आसानी से फिर अपने शुरुआती स्तरों पर लौट आई।
इस प्रकार, कुल मिलाकर इतनी महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट के बावजूद अमेरिकी डॉलर की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI) घटकर 3.5% पर आ गया, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से भी कम था। इसके बावजूद, इस महंगाई में आई नरमी से डॉलर पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
जहां तक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श (Kevin Warsh) के कांग्रेस में दिए गए भाषण का सवाल है, लेखक के अनुसार उसमें लगभग वही बातें दोहराई गईं जो जून की बैठक के बाद फेड की ओर से पहले ही कही जा चुकी थीं।
वार्श ने एक बार फिर कहा कि:
हालांकि, उन्होंने मौद्रिक नीति को और सख्त (Monetary Tightening) करने का कोई संकेत नहीं दिया।
चूंकि फेड चेयरमैन ने कोई नई जानकारी या नया संदेश नहीं दिया, इसलिए ट्रेडरों ने उनके भाषण पर लगभग कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
तकनीकी दृष्टि से, लेखक का मानना है कि ब्रिटिश पाउंड (GBP) निकट अवधि में गिरावट की ओर बढ़ सकता है।
इसके मुख्य कारण हैं:
हालांकि, मध्यम अवधि (Medium Term) के लिए लेखक अब भी ऊंचे टाइमफ्रेम पर बने साइडवेज़ चैनल (Sideways Channel) के भीतर पाउंड में दोबारा तेजी आने की संभावना देखते हैं।
मंगलवार को 5-मिनट के चार्ट पर तीन ट्रेडिंग सिग्नल बने।
ब्रिटिश पाउंड की सबसे हालिया COT रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले कई महीनों से गैर-व्यावसायिक (Non-commercial) ट्रेडर्स बाजार में मुख्य रूप से बिकवाली (Sell Positions) कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, उनकी नेट पोजीशन (Net Position) अभी भी नकारात्मक (Negative) बनी हुई है, जबकि दीर्घकालिक तेजी (Long-Term Uptrend) अभी भी कायम है।
लेखक के अनुसार, मध्य पूर्व की मौजूदा घटनाओं को देखते हुए जोखिम वाली मुद्राओं (Risk Currencies) की मांग कमजोर रहना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। औपचारिक रूप से युद्ध समाप्त होने की बात कही जा रही है, लेकिन संघर्ष अभी भी जारी है।
लेखक का मानना है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियां (Geopolitics) निकट अवधि में अमेरिकी डॉलर की मांग को समर्थन दे सकती हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि जब तक कीमत ट्रेंड लाइन (Trend Line) के नीचे मजबूती से नहीं टिकती, तब तक GBP/USD में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
लेखक के अनुसार, दीर्घकाल में अमेरिकी डॉलर कमजोर होता रहेगा, जिसका मुख्य कारण डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां होंगी। यह रुझान साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उनका मानना है कि व्यापार युद्ध (Trade War) किसी न किसी रूप में लंबे समय तक जारी रहेगा, और ट्रंप की नीतियां प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की दिशा में काम करती हैं।
लेखक यह भी बताते हैं कि दीर्घकालिक तेजी का रुझान अभी भी ट्रेंड लाइन द्वारा समर्थित है। हाल ही में कीमत इस ट्रेंड लाइन तक पहुंची थी और वहां से उछाल (Bounce) लेकर वापस ऊपर आई।
7 जुलाई की COT रिपोर्ट के अनुसार:
इस प्रकार, सप्ताह के दौरान गैर-व्यावसायिक ट्रेडर्स की नेट पोजीशन में 14,200 कॉन्ट्रैक्ट की वृद्धि हुई।
हालांकि, लेखक के अनुसार यह बढ़ोतरी पेशेवर ट्रेडर्स (Professional Players) की समग्र बाजार धारणा (Overall Sentiment) में कोई बड़ा बदलाव लाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
1-घंटे (Hourly) टाइमफ्रेम पर GBP/USD जोड़ी में एक नया गिरावट वाला ट्रेंड (Downtrend) शुरू हो सकता है या कम से कम एक सुधारात्मक गिरावट (Correction) देखने को मिल सकती है।
हाल के समय में बाजार ने अधिकांश मौलिक (Fundamental), भू-राजनीतिक (Geopolitical) और मैक्रोइकोनॉमिक (Macroeconomic) घटनाओं को नजरअंदाज किया है। वहीं, दैनिक (Daily) टाइमफ्रेम पर यह जोड़ी साइडवेज़ चैनल की निचली सीमा से ऊपरी सीमा की ओर बढ़ना शुरू कर चुकी है।
इसलिए, मध्यम अवधि (Medium Term) में अभी भी तेजी की संभावना बनी हुई है। हालांकि, जल्द ही एक तकनीकी सुधार (Technical Correction) देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह जोड़ी लगातार दो सप्ताह से अधिक समय से ऊपर बढ़ चुकी है।
इसके अलावा, Ichimoku Indicator की निम्नलिखित लाइनें भी ट्रेडिंग सिग्नल के स्रोत के रूप में काम कर सकती हैं:
यदि कीमत ट्रेड की दिशा में 20 पिप्स आगे बढ़ती है, तो स्टॉप-लॉस (Stop Loss) को ब्रेक-ईवन (Break Even) पर ले जाने की सलाह दी जाती है।
ध्यान रखें कि Ichimoku इंडिकेटर की लाइनें दिन के दौरान बदल सकती हैं, इसलिए ट्रेडिंग सिग्नल तय करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिए।
बुधवार को:
लेखक के अनुसार, इन घटनाओं का GBP/USD की चाल पर कोई विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
संभावना है कि आज भी बाजार में कम अस्थिरता (Low Volatility) देखने को मिलेगी।
यदि GBP/USD जोड़ी 1.3369 – 1.3377 क्षेत्र के नीचे मजबूती से टिकती है, तो शॉर्ट पोजीशन पर विचार किया जा सकता है।
लक्ष्य:
यदि कीमत 1.3369 – 1.3377 क्षेत्र से उछाल (Bounce) लेती है, तो लॉन्ग पोजीशन पर विचार किया जा सकता है।
लक्ष्य: